Thursday, July 16, 2026
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कारगिल की बर्फीली चोटियों पर कैसे भारतीयों जवानों ने पाकिस्तानियों को चटाई थी धूल

आज का दिन भारतीय इतिहास के उन स्वर्णिम पन्नों को याद करने का है।

आज का दिन भारतीय इतिहास के उन स्वर्णिम पन्नों को याद करने का है, जब भारत के सपूतों ने दुश्मनों को करारा जवाब देते हुए देश की अखंडता की रक्षा की थी। दरअसल हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है, जो साल 1999 में भारत की पाकिस्तान पर ऐतिहासिक जीत की याद दिलाता है। इस साल भारत 26वां कारगिल विजय दिवस मना रहा है।
 कैसे हुई थी कारगिल युद्ध की शुरुआत?
बता दें कि कारगिल युद्ध मई 1999 में उस समय शुरू हुआ, जब पाकिस्तान की सेना और आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के कारगिल जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (LOC) पार कर भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ की। दरअसल बर्फ पिघलने के बाद जब ऊंचाई वाले इलाकों में भारतीय सेना की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम थी, तभी पाकिस्तान ने इस घुसपैठ को अंजाम दिया।
पहली बार इस घुसपैठ की जानकारी स्थानीय चरवाहों ने दी थी, जिन्होंने कारगिल, द्रास, बटालिक और मुश्कोह घाटी जैसे दुर्गम क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों को देखा। पहले यह एक सीमित घुसपैठ समझी गई, लेकिन जांच के बाद सामने आया कि यह पूरी तरह पाकिस्तानी सेना की एक सुनियोजित साजिश थी।
ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन सफेद सागर
भारतीय सेना ने इस चुनौती का डटकर मुकाबला किया और “ऑपरेशन विजय” शुरू किया। भारतीय वायुसेना ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और “ऑपरेशन सफेद सागर” के तहत दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाया।
युद्ध बेहद कठिन परिस्थितियों बर्फीली चोटियां, दुर्गम पहाड़ी रास्ते और ऊपर से दुश्मन की ऊंचाई पर स्थित मजबूत चौकियां में लड़ा गया। लेकिन भारतीय जांबाजों ने अद्भुत साहस, धैर्य और पराक्रम दिखाते हुए एक-एक चोटी पर फिर से तिरंगा फहराया।
पाकिस्तान की हार और भारत की विजय
इस युद्ध में भारत के 527 सैनिक शहीद हुए और 1300 से अधिक घायल हुए। पर इन वीरों का बलिदान व्यर्थ नहीं गया। कैप्टन विक्रम बत्रा, जिन्होंने अपने शौर्य से दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए, उनका उद्घोष “ये दिल मांगे मोर” आज भी हर देशवासी को गर्व से भर देता है। लेफ्टिनेंट मनोज कुमार पांडे, ग्रेनेडियर योगेंद्र सिंह यादव, राइफलमैन संजय कुमार जैसे कई अन्य योद्धाओं ने भी देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी।
कारगिल विजय दिवस… सम्मान और श्रद्धांजलि का दिन
कारगिल विजय दिवस सिर्फ एक सैन्य जीत का प्रतीक नहीं, बल्कि देशभक्ति, त्याग और वीरता की मिसाल है। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा के लिए हमारे जवान किस हद तक जा सकते हैं। आज के दिन देशभर में शहीदों को श्रद्धांजलि दी जाती है, उनके परिवारों को सम्मानित किया जाता है और सेना के अदम्य साहस को सलाम किया जाता है।
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