चंडीगढ़: चंडीगढ़ में अब पुरानी कार या बाइक को किसी स्थानीय कबाड़ी या गैर-अधिकृत स्क्रैप कारोबारी के पास कटवाना महंगा पड़ सकता है। केंद्र सरकार के ‘एंड-ऑफ-लाइफ व्हीकल्स (ELV) नियम, 2025’ को लागू करते हुए चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण समिति (CPCC) ने स्पष्ट कर दिया है कि पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग अब केवल सरकार से मान्यता प्राप्त रजिस्टर्ड व्हीकल स्क्रैपिंग फैसिलिटी (RVSF) में ही कराई जा सकेगी।
नए नियमों के तहत यदि कोई व्यक्ति या संस्था वाहन को अवैध तरीके से स्क्रैप कराती है, तो उस पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में एफआईआर दर्ज होने और जेल की सजा का भी प्रावधान है। यह व्यवस्था शहर में पुराने वाहनों के वैज्ञानिक निपटान और प्रदूषण नियंत्रण को ध्यान में रखते हुए लागू की गई है।
नियमों के अनुसार, 20 वर्ष पुराने निजी वाहन और 15 वर्ष पुराने व्यावसायिक वाहन निर्धारित प्रक्रिया के तहत अधिकृत स्क्रैपिंग सेंटर में ही नष्ट किए जाएंगे। हालांकि वाहन को स्क्रैप करने से पहले उसकी फिटनेस और अन्य तकनीकी मानकों की भी जांच की जाएगी।
यह नियम केवल आम वाहन मालिकों तक सीमित नहीं है। जिन सरकारी विभागों, कंपनियों या संस्थानों के पास 100 या उससे अधिक वाहन हैं, उन्हें भी अपने पुराने वाहनों की स्क्रैपिंग अधिकृत केंद्र के माध्यम से ही करानी होगी।
स्क्रैपिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद वाहन मालिक को सर्टिफिकेट ऑफ डिपॉजिट (CoD) और व्हीकल स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट दिया जाएगा। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वाहन का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाएगा। साथ ही, यदि वाहन मालिक उसी श्रेणी का नया वाहन खरीदता है, तो उसे प्राइवेट वाहनों पर 25% तक और कमर्शियल वाहनों पर 15% तक मोटर व्हीकल टैक्स में छूट मिल सकती है।
प्रशासन के अनुसार, चंडीगढ़ में वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है और हर साल 10 से 15 हजार वाहन एंड-ऑफ-लाइफ (ELV) श्रेणी में पहुंच जाते हैं। ऐसे में पर्यावरण संरक्षण और अवैध स्क्रैपिंग पर रोक लगाने के लिए इन नियमों को सख्ती से लागू किया गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ पर्यावरण और मोटर वाहन कानूनों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।



