नई दिल्ली: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) से जुड़े करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए बड़ी खबर है। यदि आपने 10 साल की सेवा पूरी होने से पहले नौकरी छोड़ दी है या ऐसा करने की योजना बना रहे हैं, तो कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) के नए नियमों को जानना जरूरी है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी पेंशन योजना-1995 (EPS-1995) की जगह कर्मचारी पेंशन योजना-2026 (EPS-2026) लागू कर दी है, जो 29 जून 2026 से प्रभावी है। नई व्यवस्था में पेंशन फंड की निकासी के नियमों में अहम बदलाव किए गए हैं।
नई योजना के तहत 10 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को ही मासिक पेंशन का लाभ मिलेगा। यदि कोई कर्मचारी इससे पहले नौकरी छोड़ देता है, तो वह मासिक पेंशन का पात्र नहीं होगा। हालांकि, ऐसे कर्मचारियों के पास दो विकल्प होंगे। वे Withdrawal Benefit के तहत एकमुश्त राशि निकाल सकते हैं या स्कीम सर्टिफिकेट लेकर भविष्य में EPFO से जुड़ी किसी दूसरी नौकरी में अपनी पिछली सेवा अवधि जोड़ सकते हैं।
36 महीने बाद ही निकाल सकेंगे पैसा
EPS-2026 के तहत अब नौकरी छोड़ते ही पेंशन फंड नहीं निकाला जा सकेगा। कर्मचारी अपने खाते में आखिरी पेंशन अंशदान जमा होने की तारीख से 36 महीने (3 साल) पूरे होने के बाद ही Withdrawal Benefit का दावा कर पाएंगे। हालांकि, यदि इस अवधि के दौरान कर्मचारी सेवानिवृत्ति की आयु पूरी कर लेता है, तो उसे तीन साल का इंतजार नहीं करना होगा।
ऐसे होगी राशि की गणना
नई योजना में निकासी की राशि Table-IV के आधार पर तय की जाएगी। इसके लिए कर्मचारी की पेंशन योग्य वेतन (Pensionable Salary) को Table-IV Factor से गुणा किया जाएगा। यह फैक्टर कर्मचारी की सेवा अवधि के अनुसार अलग-अलग होगा।
उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी की पेंशन योग्य वेतन 15,000 रुपये है और उसने 24 महीने तक नौकरी की है, तो Table-IV फैक्टर 1.99 होगा। ऐसे में उसे 29,850 रुपये का Withdrawal Benefit मिलेगा।
वहीं, यदि कर्मचारी ने 60 महीने (5 साल) तक काम किया है, तो फैक्टर 5.02 होगा और उसे 75,300 रुपये की एकमुश्त राशि मिलेगी।
यानी, कर्मचारी की सेवा अवधि जितनी अधिक होगी, Table-IV फैक्टर उतना ही बढ़ेगा और निकासी पर मिलने वाली राशि भी उतनी ही ज्यादा होगी।



