Saturday, August 22, 2026
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Supreme Court ने UGC के नए नियमों पर लगाई रोक, अगली सुनवाई इस तारीख को

देशभर में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों के खिलाफ भारी विरोध हो रहा है।

इसी बीच आज सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर सुनवाई हुई। सुनवाई में कोर्ट ने UGC के जाति-आधारित भेदभाव से जुड़े नियमों पर रोक (stay) लगा दी है। कोर्ट ने कहा है कि अगले आदेश तक 2012 के पुराने नियम ही लागू रहेंगे। अगली सुनवाई अब 19 मार्च को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि UGC के नए नियमों में स्पष्टता की कमी है और उनके दुरुपयोग के अवसर हो सकते हैं। इसी वजह से कोर्ट ने नए नियमों को लागू करने से पहले रोक लगा दी है। अब जब तक कोर्ट कोई नया आदेश नहीं देती, तब तक 2012 के पुराने नियम लागू रहेंगे।
CJI सूर्यकांत की बड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कहा आजादी के 75 साल बाद भी हम जातियों से स्वतंत्र समाज नहीं बना पाए। हम शिक्षा संस्थानों में सबके लिए बराबरी और एक साथ आगे बढ़ने वाला माहौल चाहते हैं। हमें सोचना चाहिए कि क्या हम आगे बढ़ रहे हैं या पीछे जा रहे हैं? उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था हो। CJI ने यह बात जोर देकर कही कि नियम ऐसे होने चाहिए जो सभी के लिए उचित और संतुलित हों।
कोर्ट ने केंद्र व UGC से जवाब मांगा
कोर्ट की खंडपीठ CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने केंद्र सरकार और UGC से इस मामले पर भी जवाब माँगा है। अदालत ने कहा है कि नियमों के बारे में विस्तृत जानकारी दी जाए और आवश्यकता पड़ी तो विशेष कमेटी भी बनाई जा सकती है।
याचिकाकर्ताओं का क्या कहना है?
इन नियमों के खिलाफ याचिकाएं निम्न लोगों ने दायर की हैं:
-मृत्युंजय तिवारी
-एडवोकेट विनीत जिंदल
-राहुल दीवान
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि नए नियम सामान्य वर्ग के लोगों के खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा देते हैं और इससे उन्हें अनावश्यक नुकसान पहुंच सकता है।
अगली सुनवाई 19 मार्च को
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगली सुनवाई 19 मार्च, 2026 को होगी। तब तक नए नियमों को लागू नहीं किया जाएगा और 2012 के पुराने नियम ही मान्य रहेंगे।
यूजीसी के नए नियमों पर देशभर में रोष
दरअसल, UGC Equity Regulations, 2026 को 23 जनवरी 2026 को नोटिफाई किया गया। इसके खिलाफ पूरे देश में आक्रोश फैल गया और कई लोगों ने कहा कि यह नियम मनमाना है। भेदभावपूर्ण हैं। संविधान और UGC Act, 1956 के खिलाफ हैं। इसलिए कई वकीलों और नागरिकों ने इन नियमों को अवैध बताकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
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