Saturday, August 29, 2026
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पंजाबी अभिनेता जसविंदर भल्ला का भोग-अंतिम अरदास आज, कई बड़ी हस्तियां होंगी शामिल

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता और हास्य कलाकार जसविंदर भल्ला का 22 अगस्त को निधन हो गया।

पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री के मशहूर अभिनेता और हास्य कलाकार जसविंदर भल्ला का 22 अगस्त को निधन हो गया। बता दें कि 64 वर्षीय भल्ला पिछले कुछ दिनों से बीमार थे और उन्हें ब्रेन स्ट्रोक के बाद मोहाली के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के दौरान उनकी हालत गंभीर बनी रही और 22 अगस्त की सुबह 4 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरे पंजाब ही नहीं, बल्कि देशभर में उनके चाहने वालों में शोक की लहर दौड़ गई।
भल्ला का अंतिम संस्कार 23 अगस्त को मोहाली के बलौंगी श्मशान घाट में दोपहर 1 बजे किया गया, जिसमें परिवार, करीबी, फिल्म जगत की हस्तियाँ और प्रशंसक बड़ी संख्या में शामिल हुए। वहीं, उनकी आत्मा की शांति के लिए भोग और अंतिम अरदास 30 अगस्त को चंडीगढ़ के गुरुद्वारा श्री गुरु तेग बहादुर साहिब, सेक्टर 34-सी में की जाएगी। इस मौके पर फिल्म जगत के साथ-साथ सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र की बड़ी हस्तियाँ भी श्रद्धांजलि देने पहुँचेंगी। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस ने विशेष तैयारियाँ की हैं ताकि श्रद्धांजलि सभा शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न हो सके।
अभिनय और करियर
जसविंदर भल्ला का जन्म 4 मई, 1960 को लुधियाना जिले के दोराहा कस्बे में हुआ था। वे पेशे से प्रोफेसर थे और पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) लुधियाना में सेवाएँ दे रहे थे। 1988 में उन्होंने “छनकटा 88” के माध्यम से हास्य अभिनेता के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। इसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई। फिल्म “दुल्ला भट्टी” से उन्होंने बतौर अभिनेता पर्दे पर कदम रखा।
पंजाबी फिल्म जगत में वे “चाचा छात्रा” के नाम से मशहूर हुए और अपनी खास कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हँसाने का हुनर रखते थे। उनकी कॉमेडी सीरीज़ “छनकटा” बेहद लोकप्रिय रही। इसके अलावा उन्होंने कई हिट पंजाबी फिल्मों जैसे “कैरी ऑन जट्टा”, “जट्ट एंड जूलियट”, “मनजीत सिंह”, “मंडा जट्टा” और “भाजी इन प्रॉब्लम” में यादगार भूमिकाएँ निभाईं।
किसानों के लिए योगदान
जसविंदर भल्ला सिर्फ कलाकार ही नहीं, बल्कि एक जागरूक शिक्षाविद भी थे। वे पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के ब्रांड एंबेसडर बने और अपने कार्यकाल में विश्वविद्यालय की तकनीकें और साहित्य किसानों तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका जीवन किसानों की सेवा और जागरूकता को समर्पित रहा। उनके निधन से पंजाबी फिल्म इंडस्ट्री को अपूरणीय क्षति पहुँची है। दर्शक आज भी उन्हें उनकी शानदार हास्य भूमिकाओं और सादगी के लिए याद करेंगे।
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