Tuesday, July 21, 2026
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पंजाब के वकीलों को बड़ी सौगात, कोर्ट चैंबरों में भी मिलेगी 300 यूनिट मुफ्त बिजली

चंडीगढ़: पंजाब सरकार ने राज्य के वकीलों को बड़ी राहत देते हुए कोर्ट परिसरों में स्थित उनके चैंबरों को भी 300 यूनिट मुफ्त बिजली योजना का लाभ देने का फैसला किया है। इस संबंध में पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (PSPCL) ने आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है और सभी पात्र आवेदनों का निपटारा 48 घंटे के भीतर करने के निर्देश दिए हैं।

नई व्यवस्था के तहत अब कोर्ट परिसर में स्थित वकीलों के चैंबरों को भी घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की श्रेणी में रखा जाएगा। इस योजना का लाभ केवल उन अधिवक्ताओं को मिलेगा जो पंजाब एवं हरियाणा बार काउंसिल में पंजीकृत हैं और जिनके चैंबर केवल वकालत के कार्य के लिए उपयोग किए जाते हैं।

PSPCL के अनुसार, यदि किसी चैंबर की बिजली खपत दो महीने में 600 यूनिट तक रहती है तो बिजली बिल पूरी तरह माफ होगा। लेकिन निर्धारित सीमा से अधिक बिजली खर्च होने पर उपभोक्ता को पूरे यूनिट का बिल भरना होगा।

बिजली निगम के अनुसार, यह फैसला पहले ही लिया जा चुका था, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे लागू नहीं किया जा सका था। अब PSPCL के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक बसंत गर्ग ने सभी सब-डिवीजन कार्यालयों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पात्र वकीलों के आवेदन मिलने के दो कार्य दिवस के भीतर उनका निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

सरकार ने यह निर्णय राज्यभर के अधिवक्ताओं की मांग और मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के समक्ष उठाए गए मुद्दे के बाद लिया है। हालांकि, कोर्ट परिसर में मौजूद ऐसे चैंबर जिनका उपयोग कैंटीन, फोटोस्टेट सेंटर या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।

उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी ने 2022 विधानसभा चुनाव के दौरान सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद इस योजना को लागू किया गया, जिसके तहत वर्तमान में पंजाब के लगभग 90 प्रतिशत घरेलू उपभोक्ता मुफ्त बिजली का लाभ उठा रहे हैं।

वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में पंजाब सरकार ने बिजली सब्सिडी के लिए 15,550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें किसानों के लिए 7,715 करोड़ रुपये तथा घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने के लिए 5,771 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि वकीलों के चैंबरों को भी इस योजना में शामिल किए जाने से सरकार पर सब्सिडी का अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ सकता है।

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