Wednesday, July 1, 2026
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पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत करीब 2 करोड़ रुपये की लागत से 3,524 निःशुल्क आँखों के ऑपरेशन करवाए

चंडीगढ़, 30 जून 2026:

पंजाब सरकार मुख्यमंत्री सेहत योजना के माध्यम से आँखों की गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा लगातार बढ़ा रही है। इस योजना के तहत हजारों मरीजों को सरकारी तथा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में निःशुल्क आँखों के ऑपरेशन की सुविधा मिल रही है। इससे उपचार में होने वाली देरी कम हुई है, विशेषज्ञ नेत्र चिकित्सा तक लोगों की पहुँच बढ़ी है तथा विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम हुआ है।

योजना के आँकड़ों के अनुसार अब तक 3,524 मरीजों की आँखों की सर्जरी लगभग 1,98,68,890 रुपये की लागत से निःशुल्क की जा चुकी है। इनमें सबसे अधिक संख्या मोतियाबिंद के ऑपरेशनों की रही, क्योंकि यह बुजुर्गों में अंधत्व का प्रमुख कारण है।

सबसे अधिक 3,070 मरीजों की स्मॉल इन्सीजन कैटरैक्ट सर्जरी (एसआईसीएस) नॉन-फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस (आईओएल) के साथ की गई, जिनकी कुल लागत 1,54,40,380 रुपये रही। यह योजना के तहत कवर की गई आँखों की सभी सर्जरियों का 87 प्रतिशत से अधिक था।
दूसरी सबसे अधिक की गई प्रक्रिया प्टेरीजियम विद कंजंक्टाइवल ऑटोग्राफ्ट रही, जिसके तहत 333 मरीजों का उपचार किया गया और इस पर 31,83,300 रुपये खर्च हुए। इसके अलावा योजना के तहत 28 एंट्रोपियन करेक्शन, 12 एक्ट्रोपियन करेक्शन, बच्चों की लेंस सर्जरी, ग्लूकोमा का उपचार, टियर डक्ट सर्जरी तथा अन्य कई प्रकार की आँखों की सर्जरी भी निःशुल्क की गईं, जिससे सभी आयु वर्ग के मरीजों को नेत्र उपचार की सुविधा मिल रही है।

गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज, फरीदकोट के नेत्र रोग विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मुनीश धवन ने कहा कि यह योजना आँखों के आधुनिक उपचार को प्रत्येक वर्ग के लिए आसान और किफायती बना रही है। उन्होंने कहा, “इस योजना के तहत मरीजों को अत्याधुनिक नेत्र उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है। फोल्डेबल इंट्रा-ऑक्यूलर लेंस के साथ आधुनिक फेकोइमल्सिफिकेशन मोतियाबिंद सर्जरी निःशुल्क की जाती है। इसके अलावा यदि समय पर उपचार न मिले तो अंधत्व का कारण बनने वाले ग्लूकोमा का उपचार भी इस योजना में शामिल है, जिससे मरीजों पर कोई आर्थिक बोझ नहीं पड़ता।”

उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों के लिए बहुत लाभकारी सिद्ध हुई है, क्योंकि आर्थिक तंगी के कारण कई लोग उपचार टाल देते हैं। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत की जा रही आँखों की सर्जरियाँ बुजुर्ग मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हुई हैं। मोतियाबिंद की सर्जरी जैसी प्रक्रियाएँ अब अधिक सुलभ हैं। इससे मरीजों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है और वे अधिक आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जिन्हें पहले दृष्टि संबंधी समस्या के कारण दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।” उन्होंने आगे कहा, “इसके अलावा स्क्विंट (भेंगापन) का ऑपरेशन भी इस योजना के तहत निःशुल्क किया जाता है।”

डॉ. मुनीश धवन ने आँखों की बीमारियों से बचाव तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “आँखों की बीमारियों की रोकथाम पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बच्चों की नियमित दृष्टि जाँच, 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की समय-समय पर आँखों की जाँच तथा शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की नियमित निगरानी बहुत आवश्यक है, क्योंकि डायबिटीज आँखों की रोशनी पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।”

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने कहा कि योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को शामिल करने से पूरे राज्य में आधुनिक तरीके से नेत्र उपचार सेवाएँ अधिक सुलभ हो गई हैं। उन्होंने कहा, “सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों तक सेवाओं का विस्तार करके हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि अधिक से अधिक मरीजों को समय पर निःशुल्क सर्जरी मिल सके। समय पर उपचार से दृष्टि पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को रोका जा सकता है और मरीजों के जीवन में महत्वपूर्ण सुधार लाया जा सकता है।”

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की कि धुंधला दिखाई देना, आँखों में लगातार जलन, अत्यधिक पानी आना अथवा पलकों से संबंधित किसी भी प्रकार की असामान्यता जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें। उन्होंने कहा कि समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने से जटिलताओं से बचा जा सकता है और दृष्टि को सुरक्षित रखा जा सकता है। उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री सेहत योजना पंजाब की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूत बना रही है। इसके माध्यम से पात्र मरीजों को सामान्य से लेकर विशेष नेत्र सर्जरियों तक की सुविधा पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे हजारों लोग बेहतर उपचार प्राप्त कर स्वस्थ, आत्मनिर्भर और सम्मानपूर्वक जीवन व्यतीत कर रहे हैं।”

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