Friday, August 28, 2026
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पंजाब पुलिस और फिक्की कैस्केड द्वारा तस्करी एवं जालसाजी से निपटने के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की दूरदर्शी सोच के अनुरूप संगठित आर्थिक अपराधों के विरुद्ध अपनी प्रवर्तन क्षमताओं को उन्नत करने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए पंजाब पुलिस द्वारा फिक्की कैस्केड (कमेटी अगेंस्ट स्मगलिंग एंड काउंटरफिटिंग एक्टिविटीज डेस्ट्रॉयिंग द इकोनॉमी) के सहयोग से पुलिस अधिकारियों के लिए आधे दिन का क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव के निर्देशों पर आयोजित इस प्रशिक्षण सेमिनार में राज्यभर के 60 पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।

विशेष पुलिस महानिदेशक (यातायात एवं सड़क सुरक्षा) पंजाब अमरदीप सिंह राय ने कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन करते हुए अवैध व्यापार की बढ़ती जटिलता और त्वरित प्रवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कहा कि नकली सामान का व्यापार और तस्करी न केवल वैध व्यवसायों तथा सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि उपभोक्ताओं की सुरक्षा को भी खतरे में डालती है तथा अवैध नेटवर्क को बढ़ावा देती है।

सभा को संबोधित करते हुए पंजाब के अतिरिक्त सचिव, गृह मामले, अंकुरजीत सिंह ने अवैध व्यापार की बढ़ती जटिलता का उल्लेख करते हुए पुलिस कर्मियों द्वारा सक्रिय प्रवर्तन की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

जेल विभाग के सचिव मोहम्मद तैयब ने आर्थिक अपराधों के विरुद्ध जमीनी स्तर पर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निरंतर पुलिस सतर्कता के महत्व को रेखांकित किया।

दिल्ली के पूर्व विशेष पुलिस आयुक्त एवं फिक्की कैस्केड के सलाहकार दीप चंद ने नकली सामान के व्यापार और तस्करी के गंभीर आर्थिक एवं सामाजिक प्रभावों पर चर्चा की। उन्होंने संबंधित कानूनी और नियामक ढांचे की व्यापक जानकारी प्रदान करते हुए विशेष रूप से ट्रेडमार्क अधिनियम, 1999, कॉपीराइट अधिनियम, 1957 तथा भारतीय न्याय संहिता, 2023 के प्रभावी उपयोग के संबंध में अधिकारियों का मार्गदर्शन किया।

उद्योग जगत का दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए आईटीसी में कॉर्पोरेट मामलों के उपाध्यक्ष आशीष पाल ने बड़े पैमाने पर हो रही तस्करी तथा नकली सिगरेटों के व्यापार पर प्रकाश डाला। उन्होंने सरकार को होने वाले भारी राजस्व नुकसान, ट्रेडमार्क उल्लंघन तथा उपभोक्ताओं के विश्वास में कमी की ओर ध्यान आकर्षित किया।

उन्होंने यह भी बताया कि तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग कई बार आतंकवादी गतिविधियों के लिए भी किया जाता है। इस संदर्भ में उन्होंने ऐसी गतिविधियों के विरुद्ध त्वरित अभियोजन, कठोर दंड तथा सरकारी अधिकारियों और निजी खुफिया एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया।

मजबूत फील्ड प्रवर्तन सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता डॉ. ऋषि कुलश्रेष्ठ ने प्रतिभागी अधिकारियों को उन आवश्यक कानूनी एवं प्रक्रियात्मक प्रावधानों की जानकारी दी, जिनका जांच के दौरान पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि नकली सामान बनाने और तस्करी करने के आरोपियों को कठोर दंड दिलाने के लिए प्रक्रियात्मक नियमों का सावधानीपूर्वक पालन अत्यंत आवश्यक है।

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