Wednesday, August 26, 2026
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West Bengal के नए CM बने शुभेंदु अधिकारी, दिलीप-अग्निमित्रा समेत 5 नेताओं ने ली मंत्री पद की शपथ

शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है।

पश्चिम बंगाल में पहली बार बीजेपी का सीएम बन गया है। 15 साल से चल रहे ममता का शासन खत्म होने के बाद पहली बार बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। बीजेपी ने बंगाल में 200 से ज्यादा जीत जीती हैं। बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता बनाया था। आज शुभेंदु ने बंगाली भाषा में ब्रिगेड परेड ग्राउंड में सीएम पद की शपथ ली। इस मौके पर पीएम समेत, गृह मंत्री अमित शाह समेत कई राज्यों के मुख्य मंत्री शामिल रहे।
शुभेंदु अधिकारी के अलावा दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू, निसिथ प्रमाणिक ने मंत्री पद की शपथ ली है। पिछले तीन दशकों से सक्रिय शुभेंदु अधिकारी आज राज्य की राजनीति के सबसे प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। जनसंपर्क, संगठन क्षमता और प्रशासनिक अनुभव के दम पर उन्होंने बंगाल की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई है।

नए सीएम के पास 20 सालों का है अनुभव

शुभेंदु अधिकारी के पास 20 वर्षों से अधिक का विधायी अनुभव है। वे दो बार लोकसभा सांसद, तीन बार विधायक रह चुके हैं। इसके अलावा वे पिछले पांच वर्षों तक पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा चुके हैं। स्थानीय निकाय राजनीति में भी उनका लंबा अनुभव रहा है, जहां वे तीन बार पार्षद और कांथी नगरपालिका के चेयरमैन रहे।
प्रशासनिक स्तर पर भी शुभेंदु अधिकारी का अनुभव काफी व्यापक माना जाता है। वे परिवहन और सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। साथ ही उन्होंने हुगली रिवर ब्रिज कमीशन के चेयरपर्सन के रूप में भी काम किया।
हल्दिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के चेयरमैन के तौर पर एक दशक से अधिक समय तक काम करते हुए उन्होंने औद्योगिक शहर हल्दिया के विकास में अहम भूमिका निभाई। औद्योगिक ढांचे और बुनियादी विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है।
शुभेंदु अधिकारी सहकारी आंदोलन से भी लंबे समय से जुड़े रहे हैं। उन्होंने कृषि ग्रामीण बैंक, कांथी अर्बन कोऑपरेटिव और विद्यासागर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक जैसे संस्थानों में चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाली।
वे कांथी के प्रसिद्ध अधिकारी परिवार से आते हैं, जिसका स्वतंत्रता आंदोलन में विशेष योगदान रहा है। उनके पूर्वज बिपिन अधिकारी और केनाराम अधिकारी उस दौर के प्रमुख राष्ट्रवादी नेताओं में शामिल थे और बंगाल के कई स्वतंत्रता सेनानियों के साथ मिलकर काम किया था।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बिपिन अधिकारी को ब्रिटिश शासन द्वारा जेल भी जाना पड़ा था। इतना ही नहीं, अंग्रेजों ने अधिकारी परिवार के घर को दो बार आग के हवाले कर दिया था। राजनीतिक अनुभव, प्रशासनिक पकड़ और लंबे जनाधार के चलते शुभेंदु अधिकारी अब पश्चिम बंगाल की राजनीति के नए सत्ता केंद्र के रूप में देखे जा रहे हैं।
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