पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी के साथ राज्यभर में लोगों के मोबाइल फोन पर आने वाली ऑटोमेटेड (कंप्यूटराइज्ड) राजनीतिक सर्वे कॉल्स की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। कई लोगों का कहना है कि उन्हें रोजाना ऐसी कई कॉल्स प्राप्त हो रही हैं, जिनमें उनकी राजनीतिक पसंद और वोटिंग के रुझान के बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं।
इन रिकॉर्डेड कॉल्स में लोगों से पूछा जाता है कि यदि आज चुनाव हों तो वे किस पार्टी को वोट देंगे। इसके बाद अलग-अलग राजनीतिक दलों के लिए अलग-अलग नंबर दबाने का विकल्प दिया जाता है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, भाजपा, शिरोमणि अकाली दल और अन्य दलों के लिए अलग-अलग कोड बताए जाते हैं, जिनके जरिए मतदाताओं की राय जुटाई जाती है।
हालांकि चुनावों से पहले इस तरह के सर्वे आम बात माने जाते हैं, लेकिन इस बार चुनावों से कई महीने पहले ही बढ़ी कॉल्स की संख्या लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। कई लोगों का कहना है कि दिन में दो से तीन बार आने वाली ये कॉल्स अब सिरदर्द बन चुकी हैं।
बठिंडा की एक महिला ने बताया कि चुनाव अभी काफी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक सर्वे कॉल्स ने लोगों को अभी से परेशान करना शुरू कर दिया है। वहीं, कई युवाओं और किसानों का भी कहना है कि लगातार बढ़ रही इन कॉल्स के कारण लोगों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है और मोबाइल फोन का सामान्य इस्तेमाल भी प्रभावित हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस तरह की आईवीआर (IVR) कॉल्स का इस्तेमाल राजनीतिक दलों और चुनावी रणनीति तैयार करने वाली एजेंसियों द्वारा जनता का मूड जानने के लिए किया जाता है। इन सर्वेक्षणों के जरिए विभिन्न क्षेत्रों के मुद्दों, मतदाताओं की पसंद और संभावित उम्मीदवारों की लोकप्रियता का आकलन किया जाता है, ताकि उसी आधार पर चुनावी रणनीति तैयार की जा सके।
हालांकि लगातार बढ़ रही इन सर्वे कॉल्स ने अब आम लोगों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है। कई लोग ऐसी कॉल्स की संख्या को नियंत्रित करने की मांग भी कर रहे हैं।


