भारत और पाकिस्तान के सिख श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक जुड़ाव और आपसी प्रेम की एक खूबसूरत मिसाल सामने आई है। भारत से एक अत्यंत सुंदर सुनहरी फाइबर ‘पालकी साहिब’ को अटारी-वाघा सीमा के रास्ते पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा श्री ननकाना साहिब के लिए रवाना किया गया है। यह पवित्र पालकी साहिब संत बाबा दर्शन सिंह कुल्ली वालों की प्रेरणा से तैयार की गई है। इसे बाबा गुरदेव सिंह कुल्ली वालों द्वारा विशेष रूप से तैयार करवाया गया है।पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सिख श्रद्धालु भाई महेश सिंह ने गुरुद्वारा साहिब में संगत की सेवा के लिए एक नई पालकी साहिब स्थापित करने की अपील की थी, जिसके बाद इस सेवा को अमलीजामा पहनाया गया। सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद, इस पालकी साहिब को वाघा बॉर्डर के जरिए पाकिस्तान भेजा गया। सिख समुदाय इस पहल को दोनों देशों के श्रद्धालुओं के बीच अटूट विश्वास, श्रद्धा और भाईचारे के प्रतीक के रूप में देख रहा है। यह कदम सरहद पार भी सिखों की सांझी विरासत और मजबूत धार्मिक कड़ियों को दर्शाता है।