Monday, June 22, 2026
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उच्च शिक्षा विधेयक पर भगवंत मान ने जताई चिंता, केंद्र से पुनर्विचार की मांग

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रस्तावित ‘विकसित भारत शिक्षा अधिनियम-2025’ को लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार से इस विधेयक पर दोबारा विचार करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा से जुड़े किसी भी सुधार का उद्देश्य विद्यार्थियों के लिए अवसर बढ़ाना होना चाहिए, न कि उच्च शिक्षा को महंगा और अधिक केंद्रीकृत बनाना।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के करोड़ों परिवार अपने बच्चों की शिक्षा को बेहतर भविष्य की कुंजी मानते हैं। ऐसे में उच्च शिक्षा आम लोगों के लिए अवसरों का माध्यम बनी रहनी चाहिए, न कि आर्थिक बोझ का कारण।

भगवंत मान ने कहा कि प्रस्तावित विधेयक में निर्णय लेने की शक्तियों के अत्यधिक केंद्रीकरण की आशंका दिखाई देती है, जिससे राज्यों की स्थानीय जरूरतों के अनुरूप शैक्षणिक नीतियां बनाने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में राज्यों को शिक्षा के क्षेत्र में पर्याप्त अधिकार और लचीलापन मिलना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि यदि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों पर केंद्रीय नियंत्रण बढ़ता है और पर्याप्त वित्तीय सहायता सुनिश्चित नहीं की जाती, तो उच्च शिक्षा संस्थानों पर राजस्व बढ़ाने का दबाव पड़ेगा। इससे फीस में वृद्धि, स्व-वित्तपोषित पाठ्यक्रमों और निजी निवेश पर निर्भरता बढ़ सकती है, जिसका सीधा असर मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि देश की प्रगति तभी संभव है जब शिक्षा सभी वर्गों के लिए सुलभ और किफायती बनी रहे। विश्वविद्यालयों को अतिरिक्त नियंत्रण की नहीं, बल्कि बेहतर बुनियादी ढांचे, गुणवत्तापूर्ण फैकल्टी, आधुनिक प्रयोगशालाओं और अनुसंधान के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिससे किसान, मजदूर और छोटे कारोबारियों के बच्चे भी बड़े सपने देख सकें और उन्हें पूरा कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को महान बनाने का रास्ता शिक्षा पर नियंत्रण बढ़ाने से नहीं, बल्कि शिक्षा में निवेश बढ़ाने से होकर गुजरता है।

भगवंत सिंह मान ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रस्तावित विधेयक के वर्तमान स्वरूप की व्यापक समीक्षा की जाए और ऐसा ढांचा तैयार किया जाए, जो उच्च शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, सस्ती और राज्यों की आवश्यकताओं के अनुरूप बना सके।

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