Monday, July 13, 2026
HomeLatest Newsईरान का ऐसा खौफ, अमेरिकी फाइटर जेट को उतरने के लिए तुर्की...

ईरान का ऐसा खौफ, अमेरिकी फाइटर जेट को उतरने के लिए तुर्की ने नहीं दिया बेस

तुर्की जानता है कि अगर जंग के वक्त उसने अगर अमेरिका की सीधी मदद की, तो उसका नुकसान उसे उठाना पड़ेगा.

ईरान और अमेरिका के बीच जारी जंग में तुर्की से बड़ी खबर सामने आ रही है. तुर्की ने अमेरिका के उन अनुरोधों पर कोई जवाब नहीं दिया है, जिसमें वाशिंगटन ने उसकी जमीन पर फाइटर जेट उतारने की मांग की थी. इसे अमेरिका के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. क्योंकि तुर्की अमेरिका के साथ नाटो में शामिल है. तुर्की ने आधिकारिक तौर पर इसको लेकर कोई बयान नहीं दिया है.
मिडिल ईस्ट इंस्टीट्यूट के तुर्की कार्यक्रम की संस्थापक निदेशक गोनुल टोल ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से लिखा- युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका ने अंकारा से संपर्क किया. अमेरिका चाहता था कि उसके फाइटर जेट और ईंधन भरने वाले विमान को तुर्की अपनी जमीन पर उतरने दे, लेकिन अंकारा ने कोई जवाब नहीं दिया.
गोनुल टोल ने आगे कहा- अमेरिका यह चाह रहा है कि उसके फाइटर जेट को ईंधन भरने के लिए तुर्की जमीन दें. इसके लिए खुद ट्रंप प्रशासन ने तुर्की के राष्ट्रपति कार्यालय से संपर्क किया.

जंग में तुर्की का क्या है स्टैंड?

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के लिए तुर्की इजराइल को जिम्मेदार मानता है. तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन ने 3 दिन पहले संसद में कहा- इस जंग को तुरंत खत्म करने की जरूरत है. वरना पूरा मिडिल ईस्ट जल उठेगा. तुर्की युद्ध को रोकने के लिए मध्यस्थता कर रहा है.
इसके तहत ओमान के साथ मिलकर तुर्की ने मंगलवार को एक प्रस्ताव ईरान को भेजा, जिसे सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने खारिज कर दिया. तुर्की नाटो सदस्य है, लेकिन उसने जंग से खुद को दूर रख लिया है. तुर्की पर ईरान भी सिर्फ सांकेतिक हमला कर रहा है.
तुर्की सिर्फ ईरान के हमले को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात कर रहा है. उसकी कोशिश जंग में उलझने की नहीं है.

अमेरिका ने क्यों मांगी मदद?

अमेरिका अब तक इराक और खाड़ी के देशों में अपने फाइटर जेट तैनात कर रखे थे. इन्हीं ठिकानों पर ईंधन विमानों की भी तैनाती थी, लेकिन हाल ही में इराक में एक ईंधन विमान क्रैश हो गया. खाड़ी के ठिकानों पर लगातार ईरान का हमला हो रहा है. इसी कारण अमेरिका तुर्की में अपने विमानों की तैनाती चाह रहा है, जिससे उसके विमान सुरक्षित रहे.
इतना ही नहीं, तुर्की पर ईरान ताबड़तोड़ हमला नहीं कर सकता है. क्योंकि तुर्की नाटो कंट्री है. तुर्की अगर ईरान के हमले को नाटो के अनुच्छेद-5 के उल्लंघन को साबित कर देता है तो सभी नाटो सदस्य देश ईरान पर हमला शुरू कर देंगे. यही वजह है कि अमेरिका को तुर्की एक सुरक्षित ठिकाना लग रहा है.
वहीं तुर्की जानता है कि इस वक्त अमेरिका की मदद उसके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है. तुर्की ने यूएई और कुवैत का हाल देख लिया है. दोनों ही देशों में ईरान का कोहराम मचा है.
RELATED ARTICLES
spot_imgspot_imgspot_imgspot_img
Google search engine

Most Popular