Saturday, April 18, 2026
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प्रेमानंद महाराज से मिलने वृंदावन पहुंचे ‘Mahabharata’ के युधिष्ठिर, धर्म को लेकर कही ये बड़ी बात

आजकल कई बड़ी हस्तियां वृंदावन जाकर प्रेमानंद महाराज के दर्शन कर रही हैं।

इसी क्रम में टीवी सीरियल ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर का किरदार निभाने वाले अभिनेता गजेंद्र चौहान भी महाराज जी से मिलने पहुंचे। वृंदावन पहुंचकर उन्होंने प्रेमानंद महाराज को प्रणाम किया, उनका आशीर्वाद लिया और उनसे धर्म और जीवन से जुड़ी बातें कीं। मुलाकात के दौरान गजेंद्र चौहान ने महाराज जी से अपना परिचय देते हुए कहा कि उन्होंने टीवी धारावाहिक महाभारत में युधिष्ठिर की भूमिका निभाई थी। यह सुनकर प्रेमानंद महाराज ने उनका स्वागत किया और कहा—“आपने हमारे धर्म के बहुत बड़े स्वरूप का अभिनय किया है। युधिष्ठिर धर्म के प्रतीक माने जाते हैं।” महाराज जी ने युधिष्ठिर के चरित्र को धर्म और सत्य का अवतार बताया।
राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं…
इसके बाद गजेंद्र चौहान ने कहा कि वे महाभारत का एक प्रसिद्ध संवाद सुनाना चाहते हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को भी बहुत पसंद था। उन्होंने संवाद सुनाया “कोई भी पुत्र, कोई भी पिता, कोई भी परिवार, कोई भी प्रतिज्ञा, कोई भी परंपरा—राष्ट्र से ऊपर नहीं हो सकती।” यह सुनकर प्रेमानंद महाराज ने कहा-“बहुत सुंदर… सच में राष्ट्र से ऊपर कुछ नहीं होता।”
वनवास का प्रसंग सुनाया
गजेंद्र चौहान ने महाभारत का एक और प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि जब पांडवों को वनवास जाना था, तब द्रौपदी (पांचाली) वनवास जाने के लिए तैयार नहीं थीं। तब युधिष्ठिर ने उन्हें समझाते हुए कहा था भगवान श्रीराम जानते थे कि सोने का हिरण असली नहीं होता। माता सीता भी यह जानती थीं। फिर भी जो होना था, वही हुआ। युधिष्ठिर ने कहा था कि जीवन में कई घटनाएं हमारे कर्मों का फल होती हैं। कुछ चीजें ऐसी होती हैं जिन्हें कोई नहीं रोक सकता- न शक्ति, न बल, न हथियार। उन्होंने यह भी कहा था कि बड़े बुजुर्गों की आज्ञा का पालन करना ही मर्यादा है, इसलिए वनवास जाना ही सही रास्ता था।
गजेंद्र चौहान का करियर
गजेंद्र चौहान ने महाभारत के अलावा कई फिल्मों और टीवी शोज़ में काम किया है। लेकिन आज भी लोग उन्हें युधिष्ठिर के किरदार के लिए सबसे ज्यादा याद करते हैं। वे आखिरी बार साल 2006 में फिल्म “मेरे जीवन साथी” में नजर आए थे।
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