Saturday, April 18, 2026
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दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर भारत ने चीन को दी चेतावनी, कहा- फैसले पर सिर्फ तिब्बती धर्मगुरू का हक

दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है।

 दलाई लामा के उत्तराधिकारी को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता जा रहा है। चीन का कहना है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को तय करने के लिए उसकी मंजूरी जरूरी होगी। लेकिन अब भारत ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ कर दिया है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को तय करने का अधिकार सिर्फ दलाई लामा के पास है, किसी और को इसमें दखल देने का हक नहीं है।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “दलाई लामा का पद केवल तिब्बत के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में उनके अनुयायियों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उनके उत्तराधिकारी का फैसला केवल वही कर सकते हैं। इसमें किसी और को बोलने या दखल देने का कोई अधिकार नहीं है।” रिजिजू का यह बयान चीन के हालिया बयान के तुरंत बाद आया है, जिसमें चीन ने कहा था कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को तय करने से पहले उसकी मंजूरी जरूरी होगी।
चीन ने क्या कहा था?
चीन ने बुधवार को बयान दिया कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चीन की मंजूरी के बिना मान्यता नहीं मिलेगी। चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी लंबे समय से यह दावा करती रही है कि उसे दलाई लामा जैसे धार्मिक पदों पर नियंत्रण रखने का हक है। इस कारण तिब्बती बौद्ध धर्मगुरुओं और चीन के बीच तनाव बना रहता है।
दलाई लामा का जवाब क्या था?
दलाई लामा ने भी उसी दिन इस मुद्दे पर अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा कि दलाई लामा की संस्था जारी रहेगी और उनके उत्तराधिकारी का फैसला गादेन फोडरंग ट्रस्ट करेगा, न कि कोई और। यह ट्रस्ट दलाई लामा ने 2015 में खुद स्थापित किया था। इससे पहले दलाई लामा कह चुके हैं कि उनके उत्तराधिकारी को लेकर कई विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा था कि उत्तराधिकारी एक महिला भी हो सकती है या फिर ऐसा व्यक्ति जो चीन के बाहर जन्मा हो।
क्या है विवाद की जड़?
चीन नहीं चाहता कि दलाई लामा जैसा कोई प्रभावशाली तिब्बती नेता उसके नियंत्रण से बाहर हो। जबकि तिब्बती लोग और दुनिया भर के बौद्ध अनुयायी मानते हैं कि यह एक धार्मिक परंपरा है और इसका निर्णय पूरी तरह से दलाई लामा और उनके बनाए गए ट्रस्ट को ही लेना चाहिए। इस विवाद ने तिब्बत और चीन के बीच के रिश्तों को और जटिल बना दिया है, वहीं भारत ने एक तरह से तिब्बतियों के समर्थन में खड़े होकर चीन को सख्त संदेश दिया है।
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