Friday, September 18, 2026
HomeLatest Newsसिर्फ धूम्रपान ही नहीं, प्रदूषण भी बन रहा फेफड़ों के कैंसर की...

सिर्फ धूम्रपान ही नहीं, प्रदूषण भी बन रहा फेफड़ों के कैंसर की बड़ी वजह! ये 6 संकेत दिखें तो तुरंत कराएं जांच

आमतौर पर माना जाता है कि फेफड़ों का कैंसर केवल सिगरेट या तंबाकू का सेवन करने वालों को होता है, लेकिन अब विशेषज्ञ इस धारणा को गलत बता रहे हैं। हाल के वर्षों में बड़ी संख्या में ऐसे मरीज सामने आए हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया, फिर भी वे फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित पाए गए। डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ता वायु प्रदूषण, घर के अंदर का दूषित वातावरण और आनुवंशिक बदलाव भी इस गंभीर बीमारी का कारण बन सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया भर में फेफड़ों के कैंसर के 10 से 25 प्रतिशत मामले ऐसे लोगों में मिल रहे हैं जिन्होंने कभी सिगरेट नहीं पी। भारत में यह आंकड़ा और भी अधिक है, जहां करीब 30 से 50 प्रतिशत मरीज गैर-धूम्रपान करने वाले हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अब यह बीमारी केवल बुजुर्ग पुरुषों तक सीमित नहीं रही, बल्कि युवाओं और महिलाओं में भी इसके मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक प्रदूषण, हवा में मौजूद PM2.5 जैसे सूक्ष्म कण, सेकेंड हैंड स्मोक, रेडॉन गैस और खराब वेंटिलेशन वाले घरों में लकड़ी या अन्य ठोस ईंधन से निकलने वाला धुआं फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय तक इनके संपर्क में रहने से कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि गैर-धूम्रपान करने वाले अक्सर लगातार खांसी या सांस से जुड़ी परेशानियों को सामान्य बीमारी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी कारण कई मामलों में बीमारी का पता देर से चलता है। यदि कुछ लक्षण तीन सप्ताह से अधिक समय तक बने रहें तो तुरंत विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।

Lung Cancer: Causes, Symptoms & Treatment Options

 

इन 6 लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें:

  • तीन सप्ताह से अधिक समय तक लगातार रहने वाली खांसी।
  • हल्का काम करने पर भी सांस फूलना या घरघराहट होना।
  • खांसी के साथ खून या जंग जैसे रंग का बलगम आना।
  • सीने, पीठ या कंधे में लंबे समय तक दर्द बने रहना।
  • बार-बार निमोनिया या ब्रोंकाइटिस होना और दवाओं से राहत न मिलना।
  • बिना वजह तेजी से वजन घटना, लगातार थकान रहना या आवाज बैठ जाना।

विशेषज्ञों की सलाह है कि प्रदूषण वाले दिनों में N95 या FFP2 मास्क का इस्तेमाल करें, घर में पर्याप्त वेंटिलेशन रखें, अत्यधिक प्रदूषण के दौरान खुले में व्यायाम करने से बचें और यदि लंबे समय तक खांसी या सांस संबंधी समस्या बनी रहे तो बिना देर किए डॉक्टर से जांच कराएं। समय पर पहचान होने पर फेफड़ों के कैंसर का इलाज अधिक प्रभावी हो सकता है।

नोट: यह खबर केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी प्रकार के लक्षण या स्वास्थ्य समस्या होने पर योग्य चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

RELATED ARTICLES
Google search engine
Google search engine

Most Popular