Friday, July 17, 2026
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व्हीलचेयर पर शुरू हुआ सफर, अब पैरालंपिक तक पहुंचने का सपना… लुधियाना के दंपती की प्रेरणादायक कहानी

लुधियाना: पंजाब के लुधियाना निवासी व्हीलचेयर पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी अश्वनी साहोता और उनकी पत्नी शबाना सीमित संसाधनों के बावजूद पैरालंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजोए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। दोनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई पदक जीत चुके हैं, लेकिन उनकी सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, आर्थिक तंगी और सुविधाओं की कमी की लंबी कहानी छिपी है।

अश्वनी और शबाना कई वर्षों तक साधारण बास्केटबॉल व्हीलचेयर पर ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेते रहे, क्योंकि विशेष पैरा बैडमिंटन स्पोर्ट्स व्हीलचेयर खरीदना उनके लिए संभव नहीं था। एक स्पोर्ट्स व्हीलचेयर की कीमत करीब 75 हजार रुपये होने के कारण उन्हें आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

इन कठिनाइयों के बावजूद दोनों खिलाड़ियों ने लगातार शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में कई पदक अपने नाम किए। शबाना ने युगांडा व्हीलचेयर पैरा बैडमिंटन इंटरनेशनल में दो रजत पदक जीते, जबकि हाल ही में मिस्र में हुए टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्होंने बहरीन में होने वाली पैरा बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के लिए भी क्वालिफाई किया।

शबाना ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय लुधियाना के डिप्टी कमिश्नर हिमांशु जैन द्वारा दी गई आर्थिक सहायता को दिया। वहीं, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC), यूनाइटेड सिख्स और जिला प्रशासन ने भी उनके यात्रा खर्च, उपकरण और अन्य जरूरी सुविधाओं में सहयोग किया।

हालांकि, दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेलने, बेहतर प्रशिक्षण, विदेशी प्रतियोगिताओं में भाग लेने और विशेष व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं के लिए उन्हें अभी भी नियमित आर्थिक सहायता की जरूरत है। उन्होंने कॉर्पोरेट संस्थानों, सामाजिक संगठनों और खेल प्रेमियों से सहयोग की अपील की है ताकि उनका पैरालंपिक का सपना साकार हो सके।

अश्वनी का कहना है कि वे जीवन और खेल, दोनों में एक-दूसरे का सहारा हैं। जब एक खिलाड़ी निराश होता है तो दूसरा उसे आगे बढ़ने का हौसला देता है। वहीं शबाना का कहना है कि लोग सिर्फ उनके मेडल देखते हैं, लेकिन उनके पीछे छिपे संघर्ष, रोज़ की मेहनत और आर्थिक परेशानियों को बहुत कम लोग समझते हैं।

दंपती ने प्रशासन से शास्त्री हॉल में उनके अभ्यास के लिए इस्तेमाल होने वाले खराब हो चुके लकड़ी के बैडमिंटन कोर्ट की मरम्मत कराने, व्हीलचेयर खिलाड़ियों के लिए सुलभ शौचालय बनाने और योग्य पैरा बैडमिंटन कोच की नियुक्ति करने की भी मांग की है। उनका मानना है कि बेहतर सुविधाएं मिलने से न सिर्फ उनका प्रदर्शन सुधरेगा, बल्कि अधिक दिव्यांग खिलाड़ी भी इस खेल से जुड़ने के लिए प्रेरित होंगे।

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