Friday, July 24, 2026
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Jalandhar के इन इलाकों में 50 प्रतिशत तक बढ़ेगा प्रापर्टी का रेट! जल्द लागू हो सकता है फैसला

रजिस्ट्री लिखने का काम सुविधा सैंटर के हवाले करती है तो सुविधा केंद्र के कर्मचारी

डिप्टी कमिश्नर कम जिला कलैक्टर डा. हिमांशु अग्रवाल ने जिला के सभी एस.डी.एम. को कलैक्टर रेट बढ़ाने को लेकर उनके संबंधित क्षेत्रों के प्रपोजल रेट मांगे है। इसके तहत अब जिला भर में प्रॉपर्टी के नए कलैक्टर रेट भी जल्द लागू होने के आसार बन गए हैं।
नए कलैक्टर रेटों में सबसे ज्यादा असर शहर की सबसे महंगा व पॉश एरिया माने जाने वाले 66 फुटी रोड पर पड़ेगा। जहां मौजूदा कलैक्टर रेट को 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का प्रपोजल तैयार किया गया है क्योंकि पिछले समय में 66 फुटी रोड में हुई डिवैल्पमैंट व नए प्रोजैक्टों की वजह से वहां की रिहायशी व कमर्शियल प्रॉपर्टी के रेट मॉडल टाऊन जैसे पॉश एरिया से भी महंगी हो गई है।
इसके अलावा 88 फुटी रोड के आसपास के इलाकों की एग्रीकल्चरल लैंड के कलैक्टर रेट भी 50 प्रतिशत तक बढ़ाए जाने की संभावाना है हालांकि 66 फुट रेट के कलैक्टर रेट असल मार्कीट वैल्यू से कहीं ज्यादा कम रखे गए हैं।
सूत्रों की मानें तो पिछले वषों के दौरान जब भी जिला में नए कलैक्टर रेट लागू किए जाते रहे है तो ऐसे समय में 66 फुटी रोड के डिवैलपर्स के इशारों या कहे मिलीभगत के चलते अधिकारी कलेक्टर रेट मार्किट वैल्यू के अनुसार बढ़े प्रॉपर्टी के रेट की भांति बढ़ाने से गुरेज करते रहे हैं परंतु अब माना जा रहा है कि डिप्टी कमिश्नर व अन्य अधिकारियों की सबसे ज्यादा निगाहें 66 फुटी रोड के कलैक्टर रेटों को बढ़ाने पर टिकी हुई है।
इसके अलावा जिला में सबसे ज्यादा कलैक्टर रेट फिल्लौर हलका में बढ़ाने की प्रपोजल तैयार की जा रही है जबकि शहर से संबंधित आदर्श नगर, शक्ति नगर, बस्ती यात क्षेत्र, मकसूदा, मिलाप चौंक, भाई दित्त सिंह नगर, लम्बा पिंड, पठानकोट रोड, होशियारपुर रोड, सैंट्रल टाऊन, न्यू जवाहर नहर, मोता सिंह नगर, मास्टर तारा सिंह नगर, रामा मंडी के इलाकों सहित अन्य क्षेत्रों में कलेक्टर रेट 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ाने की प्रपोजल तैयार की गई है।
इसके अलावा डिप्टी कमिश्नर ने सभी एस.डी.एम. को कलैक्टर रेटों के नए प्रपोजल के साथ हरेक एरिया के खसरा नंबर भी साथ एडिट करने के निर्देश दिए हैं ताकि सरकार जब भी रजिस्ट्री लिखने का काम सुविधा सैंटर के हवाले करती है तो सुविधा केंद्र के कर्मचारी खसरा नंबरों के आधार पर कलैक्टर रेट्स के मुताबिक बनती रजिस्ट्रेशन फीस की वसूली कर सकें और किसी प्रकार के रेवेन्यू लॉस की संभावना न रह सके।
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