Sunday, June 14, 2026
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नशे की लत के खिलाफ जंग में शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भूमिका सबसे अधिक महत्वपूर्ण: डॉ. बलबीर सिंह

भगवंत मान सरकार की ‘युद्ध नशों के विरुद्ध’ मुहिम के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से सामने आने लगे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान की स्थायी सफलता केवल नशा तस्करों और सप्लायरों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई पर ही निर्भर नहीं करती, बल्कि इसकी सफलता का आधार रोकथाम, समय पर पहचान, प्रभावी उपचार तथा परिवारों और समाज द्वारा दिया जाने वाला सहयोग भी है।

1 मार्च 2025 को शुरू की गई ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ मुहिम राज्य की सबसे महत्वपूर्ण नशा-विरोधी पहलों में से एक बन चुकी है। इस अभियान के अंतर्गत जहां एक ओर नशा तस्करों और अवैध नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है, वहीं दूसरी ओर नशामुक्ति, पुनर्वास और जन-जागरूकता को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है।

पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि रोकथाम और पुनर्वास प्रयासों के तहत 1 मार्च 2025 से मई 2026 तक पंजाब के विभिन्न नशामुक्ति केंद्रों और ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (ओ ओ ए टी ) केंद्रों में नशे से प्रभावित 90,000 से अधिक व्यक्तियों को भर्ती कर उनका उपचार किया गया है। उन्होंने कहा कि यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि पंजाब सरकार नशों के खिलाफ केवल दंडात्मक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित लोगों को उपचार और पुनर्वास के माध्यम से सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए भी गंभीरतापूर्वक कार्य कर रही है।

उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में नशों के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी है, लेकिन ऐसे संवेदनशील व्यक्तियों की पहचान करने में, जिनमें नशे की आदत विकसित होने का खतरा हो, शिक्षकों, अभिभावकों और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नशे की लत के शुरुआती संकेत अक्सर अनदेखे रह जाते हैं और ये भावनात्मक, व्यवहारिक तथा शारीरिक परिवर्तनों के रूप में दिखाई देते हैं।

भगवंत मान सरकार का मानना है कि नशे की समस्या से निपटने के तीन प्रमुख स्तंभ हैं—नशामुक्ति, पुनर्वास और काउंसलिंग। ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान के माध्यम से सरकार नशीले पदार्थों की आपूर्ति पर रोक लगाने, नशों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा प्रभावित व्यक्तियों की सफल रिकवरी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

सरकार का स्पष्ट मत है कि नशों के खिलाफ लड़ाई केवल कठोर कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती। परिवारों, शैक्षणिक संस्थानों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और समाज को मिलकर शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान करनी होगी तथा प्रभावित व्यक्तियों को उपचार, पुनर्वास और पुनर्स्थापन की दिशा में सहयोग देना होगा। अभियान इस बात पर विशेष बल देता है कि नशा तस्करों के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के प्रयास भी निरंतर जारी रहने चाहिए, तभी पंजाब को नशों की इस गंभीर समस्या से स्थायी रूप से मुक्त किया जा सकेगा।

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