Sunday, August 9, 2026
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बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए आगे आए संत सीचेवाल, जिंदगियां बचाने में जुटे

जब पूरा देश आजादी का जश्न मनाने में व्यस्त है, ऐसे समय में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने के लिए जुटे हुए हैं।

जब पूरा देश आजादी का जश्न मनाने में व्यस्त है, ऐसे समय में राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की जान बचाने के लिए जुटे हुए हैं। ब्यास नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर ने प्रभावित गांवों के लोगों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। संत सीचेवाल सुबह 8 बजे से ही ब्यास के आसपास के डूबे हुए इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के काम में लगे हुए थे। उन्होंने गांव सांगर में एक परिवार के बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला। संत सीचेवाल के सेवकों ने पिछले तीन दिनों में मंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों से 125 से अधिक लोगों को बाहर निकाल कर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है। राज्यसभा सदस्य संत बलबीर सिंह सीचेवाल प्रशासनिक अधिकारियों को लगातार निर्देश दे रहे हैं कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्राथमिकता के आधार पर तैनात रहें। वे विशेष रूप से ड्रेनेज विभाग के साथ निरंतर संपर्क में हैं।
गांव सांग्रा में मोटरबोट के जरिए पहुंचे संत सीचेवाल के साथ कपूरथला के अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर, सुल्तानपुर लोधी की एस.डी.एम. कालिया, एस.पी. कपूरथला गुरप्रीत सिंह और डी.एस.पी. हरगुरदेव सिंह भी मौजूद थे। उन्होंने गांव सांग्रा में एक घर से दो बच्चों को उनकी मां सहित बाहर निकाला। उस घर के आसपास कई स्थानों पर 5 से 7 फीट तक पानी भरा हुआ है। मंड क्षेत्र के 8 से 10 गांव पानी से पूरी तरह घिरे हुए हैं और इन क्षेत्रों में पशुओं को लेकर बड़ी समस्या सामने आई है। गांव सांग्रा की एक महिला ने बताया कि उनके पास 10 भैंसें हैं, जिनमें से कई दूध देने वाली हैं। अगर पानी और बढ़ता है तो मवेशियों को बाहर निकालना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
उधर कपूरथला प्रशासन के अनुसार अब तक 300 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है, लेकिन कई परिवार अभी भी अपने घरों में ही रहना पसंद कर रहे हैं। ब्यास दरिया में पहले ही जलस्तर बढ़ा हुआ था, जो अब और बढ़कर 1.25 लाख क्यूसेक तक पहुंच चुका है। इसके चलते सुल्तानपुर लोधी के मंड क्षेत्र के 22 गांव पानी में डूब चुके हैं। ड्रेनेज विभाग के एस.डी.ओ. ने बताया कि पहले से ही पानी में डूबे गांवों को जलस्तर बढ़ने से ज़्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि वहां पहले ही 5 से 7 फीट तक पानी भरा हुआ है और पिछले तीन दिनों से बाढ़ की स्थिति बनी हुई है।
इस दौरान राज्यसभा सदस्य संत सीचेवाल और उनके सेवकों ने सबसे अधिक प्रभावित गांव बाउपुर से लगभग 125 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। सीचेवाल और उनके अनुयायियों ने बाढ़ पीड़ितों के लिए सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की है और जानवरों के लिए चारे की भी व्यवस्था की है। 100 फीट चौड़े कटाव को बंद करना बेहद मुश्किल हो गया है, क्योंकि दरिया के पानी का बहाव बहुत तेज है। यह काम तभी शुरू हो सकेगा जब जलस्तर घटेगा।
विभाग रेत की बोरियां तैयार कर रहा है ताकि जैसे ही जलस्तर कम हो, कटाव को बंद किया जा सके। सबसे ज्यादा प्रभावित गांवों में बाउपुर, बाउपुर कदीम, जदीद और सांग्रा शामिल हैं, जहां धान की खड़ी फसलें 5 से 6 फीट पानी में डूब गई हैं। संत सीचेवाल ने राहत सामग्री पहुंचाने के लिए दो मोटरबोटों को सेवा में लगाया है। उधर, डिप्टी कमिश्नर कपूरथला ने ड्रेनेज, राजस्व, स्वास्थ्य और पशुपालन विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को राहत कार्यों में सहायता करने और किसी भी चुनौती का तुरंत समाधान करने के लिए सुल्तानपुर लोधी में तैनात रहने के निर्देश दिए हैं। ड्रेनेज विभाग को धुस्सी बांध की लगातार निगरानी करने के लिए कहा गया है, जिसमें रात की गश्त भी शामिल है।
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