मानसून के आगमन से पहले अमृतसर प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मानसून के आगमन से पहले अमृतसर प्रशासन ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। जिले की डिप्टी कमिश्नर साक्षी साहनी ने सभी विभागों को अपने-अपने कार्यालय परिसरों में पौधारोपण के लिए उपयुक्त स्थान चिह्नित करने के निर्देश दिए हैं। इस पहल का उद्देश्य बढ़ते तापमान को नियंत्रित करना और शहरी हरित क्षेत्र को बढ़ावा देना है।
डीसी साक्षी साहनी ने मंगलवार को अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक के दौरान कहा, “गर्मी से राहत पाने और पर्यावरण को संतुलित रखने का वृक्षारोपण सबसे प्रभावी उपाय है। पेड़ न केवल छांव देते हैं, बल्कि वायुमंडल को शुद्ध भी करते हैं।” उन्होंने बताया कि जिले में सैटेलाइट हीट मैप के माध्यम से उन इलाकों की पहचान की गई है, जहां अत्यधिक गर्मी दर्ज की गई है, और वहीं प्राथमिकता के आधार पर पौधारोपण किया जाएगा।
-मियावाकी तकनीक से बनेगा शहरी जंगल
कम स्थान में अधिक पेड़ लगाने के लिए प्रशासन मियावाकी तकनीक का उपयोग करेगा। यह जापानी पद्धति घने वनों के विकास के लिए प्रसिद्ध है, जिसमें देशी प्रजातियों के पौधे एक-दूसरे के निकट लगाए जाते हैं। इससे जैव विविधता में वृद्धि होती है और मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। यह तकनीक पार्किंग स्थलों, पेट्रोल पंपों, स्कूल-कॉलेज परिसरों और रिहायशी क्षेत्रों में लागू की जाएगी। विशेष रूप से, प्रत्येक ट्यूबलर संरचना के पास पांच पौधे लगाने की योजना है।
-संरक्षण भी उतना ही जरूरी
पिछले वर्षों में किए गए वृक्षारोपण की समीक्षा करते हुए डिप्टी कमिश्नर ने अधिकारियों को पौधों की जीवित रहने की दर का डेटा एकत्र करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा, “पेड़ लगाना सिर्फ सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का नैतिक कर्तव्य और पुण्य कार्य है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वृक्ष संरक्षण नीति के तहत अब बिना एसडीएम की अनुमति के गैर वन क्षेत्र में भी पेड़ काटना प्रतिबंधित है।