ड्रग केस में एसआईटी की जांच का सामना कर रहे अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुरक्षा कटौती के मामले में हाईकोर्ट ने भी झटका दे दिया है।
ड्रग केस में एसआईटी की जांच का सामना कर रहे अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को सुरक्षा कटौती के मामले में हाईकोर्ट ने भी झटका दे दिया है। बिक्रम सिंह मजीठिया की सुरक्षा बढ़ाने की मांग को लेकर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसके दौरान हाईकोर्ट ने फिलहाल सुरक्षा को बढ़ाने से इंकार कर दिया है।
मजीठिया की ओर से दी गई दलीलों पर अदालत ने कोई विशेष गंभीरता नहीं दिखाई। कोर्ट ने फिलहाल उन्हें जैड+ श्रेणी की सुरक्षा मुहैया कराने से इनकार कर दिया है
हाईकोर्ट ने ये कहा..
कोर्ट ने साफ किया कि सुरक्षा का मामला केवल आशंका या राजनीतिक आधार पर तय नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने यह जिम्मेदारी पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी है कि वे मजीठिया की सुरक्षा स्थिति का पुन: मूल्यांकन करें। विशेष रूप से, अदालत ने पंजाब के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) को खुद इस मामले की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।
एडीजीपी को मिली बड़ी जिम्मेदारी
हाईकोर्ट के अनुसार, एडीजीपी न केवल पंजाब में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच करेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार से भी इनपुट लेने की छूट दी गई है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मजीठिया की सुरक्षा को लेकर कोई चूक न हो और यथोचित स्तर की सुरक्षा प्रदान की जाए।
पुलिस प्रमुख को देनी होगी रिपोर्ट
पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को निर्देश दिए गए हैं कि वह सुरक्षा की इस समीक्षा प्रक्रिया और उसके परिणामों से हाईकोर्ट को अवगत कराएं। अदालत ने इस मामले को पूरी संजीदगी से लेते हुए अगली सुनवाई की तारीख 2 मई 2025 तय की है।
क्या आगे मिल सकती है सुरक्षा?
अगर सुरक्षा समीक्षा में यह पाया जाता है कि मजीठिया को वास्तविक खतरा है, तो उनकी सुरक्षा श्रेणी को बढ़ाया जा सकता है। लेकिन फिलहाल अदालत ने कोई भी त्वरित राहत नहीं दी है और सारी प्रक्रिया को प्रशासनिक और जांच एजेंसियों पर छोड़ दिया है।
अगली सुनवाई के साथ नजरें रिपोर्ट पर टिकीं
अब सबकी नजरें 2 मई की सुनवाई पर हैं, जहां पंजाब पुलिस की रिपोर्ट और केंद्र से मिले संभावित इनपुट के आधार पर अदालत अपना अगला फैसला दे सकती है।
राजनीतिक हलचलों के बीच यह फैसला अहम
गौरतलब है कि बिक्रम सिंह मजीठिया लंबे समय से राजनीतिक हमलों और विवादों के केंद्र में रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा को लेकर अदालत में याचिका दायर की गई थी, जिसमें उन्हें जैड+ श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने की मांग की गई थी। हालांकि अदालत का रुख स्पष्ट है कि सुरक्षा का निर्धारण ठोस तथ्यों और खतरे के वास्तविक मूल्यांकन के आधार पर ही किया जाएगा, न कि केवल राजनीतिक स्थिति या व्यक्ति की हैसियत के आधार पर।